अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी (Blockade) शुरू कर दी है जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। 14 अप्रैल 2026 से लागू हुए इस फैसले के बाद सऊदी अरब काफी चिंतित है। सऊदी को डर है कि इस कदम से ईरान नाराज होकर अन्य समुद्री रास्तों को बंद कर सकता है, जिससे तेल के व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा।

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अमेरिका की घेराबंदी और अब तक की कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर US Navy ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी की है। CENTCOM के मुताबिक यह कार्रवाई 14 अप्रैल 2026 को दोपहर 1400 GMT से शुरू हुई। अब तक 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक इस काम में लगे हैं और दो तेल टैंकरों को भी रोका गया है। अमेरिका का कहना है कि वह उन सभी जहाजों को पकड़ेगा जिन्होंने ईरान को टोल दिया है।

सऊदी अरब की चिंता और मांग

सऊदी अरब अमेरिका का करीबी साथी है, लेकिन वह इस नाकाबंदी से खुश नहीं है। सऊदी को डर है कि ईरान बदला लेने के लिए बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य को निशाना बना सकता है। यह रास्ता सऊदी के तेल निर्यात के लिए बहुत जरूरी है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिका से मांग कर रहे हैं कि वह इस घेराबंदी को हटाए और ईरान के साथ बातचीत शुरू करे।

ईरान और अन्य देशों का क्या कहना है

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को बंद किया गया, तो खाड़ी के कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेंगे। वहीं UAE के मंत्री Sultan Al Jaber ने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर सिर्फ ईरान का हक नहीं है और इसे बंद करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। इस बीच पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य विवरण जानकारी
नाकाबंदी की तारीख 14 अप्रैल 2026
तैनात अमेरिकी सैनिक 10,000 से अधिक
प्रभावित क्षेत्र Strait of Hormuz और ईरानी बंदरगाह
सऊदी अरब का डर Bab al-Mandeb जलडमरूमध्य में रुकावट
मध्यस्थ देश पाकिस्तान
अमेरिकी कार्रवाई दो तेल टैंकरों को रोका गया
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.