अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की समुद्री नाकाबंदी करने का फैसला उल्टा पड़ गया है और इससे शांति की कोशिशें रुक गई हैं। अब ईरान के सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच दोबारा लड़ाई शुरू होना तय है।
अमेरिका की नाकाबंदी से क्या असर हुआ?
Quincy Institute for Responsible Statecraft के कार्यकारी उपाध्यक्ष Trita Parsi ने कहा कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी ने डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उनके अनुसार, इस कदम ने कूटनीतिक प्रगति के रास्ते बंद कर दिए हैं। यह नाकाबंदी 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे लागू की गई थी, जिसमें ईरान के तटीय बंदरगाहों पर आने और जाने वाले जहाजों को रोका जा रहा है। हालांकि, उन जहाजों को अनुमति है जो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरकर अन्य गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं।
ईरान ने क्यों दी युद्ध की चेतावनी?
ईरान के सैन्य अधिकारी Mohammad Jafar Asadi ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से संघर्ष होने की पूरी संभावना है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकाबंदी खत्म करने की बात कही गई थी। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और इसे असहनीय करार दिया। वहीं, ईरान के नौसेना कमांडर ने चेतावनी दी कि वे जल्द ही एक ऐसा नया हथियार पेश करेंगे जिससे दुश्मन डर जाएगा।
ट्रंप प्रशासन और युद्ध की स्थिति क्या है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को बिखरा हुआ बताया और उनके शांति प्रस्ताव पर असंतोष जताया। ट्रंप ने कांग्रेस को सूचित किया कि ईरान में युद्ध 28 फरवरी 2026 को ही खत्म हो गया था, ताकि उन्हें सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी न लेनी पड़े। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक CENTCOM ने ट्रंप को एक अंतिम प्रहार (final blow) की योजना के बारे में जानकारी दी है और ट्रंप बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान की नाकाबंदी कब शुरू की थी?
अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे ईरान के तटों पर नौसैनिक नाकाबंदी शुरू की थी।
ईरान का अमेरिका को क्या प्रस्ताव था?
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और नाकाबंदी खत्म करने का प्रस्ताव दिया था, ताकि परमाणु बातचीत से पहले युद्धविराम और समुद्री मुद्दों को हल किया जा सके।