हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास जहाजों पर हुए हमलों ने भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा दिया है. इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका आरोप ईरान पर लगाया है, लेकिन अमेरिकी सेना और भारत सरकार की बातें कुछ और ही कह रही हैं.
हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास तीन जहाजों पर हमला अमेरिकी नौसेना ने किया था. इस हमले में M/T Settebello जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविक—आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पाटनला सुरेश की मौत हो गई. भारत के बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन मौतों की जानकारी दी है.
ट्रंप के दावे और अमेरिकी सेना की सच्चाई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया और उन्होंने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान शांति समझौते के मामले में ईमानदारी नहीं दिखा रहा है. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने खुद M/T Marivex, M/T Settebello और M/T Jalveer जहाजों को रोका था. सेना के मुताबिक ये जहाज ईरान के तेल को गैरकानूनी तरीके से ले जा रहे थे, इसलिए उन पर हमला किया गया. सेना ने बताया कि M/T Settebello के इंजन रूम पर हेलफायर मिसाइल दागी गई थी.
भारत का कड़ा विरोध और प्रवासियों की चिंता
भारत सरकार ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी Chargé d’Affaires जेसन मीक्स को दो बार बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. खाड़ी क्षेत्र में लगभग 18,000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार चिंतित है. भारत ने वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने की मांग की है.
जहाज मैनेजर और ईरान का पक्ष
दुबई स्थित जहाज मैनेजर IOS Marine FZE ने अमेरिकी सेना के दावों को गलत बताया है. कंपनी का कहना है कि जहाज का ईरान या ईरानी तेल से कोई लेना-देना नहीं था और वह केवल व्यापारिक काम कर रहा था. कंपनी ने इस घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है. दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है और कहा है कि ऐसी हरकतें वैश्विक शांति के लिए खतरा हैं.
