अमेरिका की नेवी द्वारा किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है। इस गंभीर घटना के बाद भारत सरकार ने बहुत कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी अधिकारियों से बात कर इस हमले पर अपना कड़ा विरोध जताया है।
क्या था पूरा मामला
गल्फ ऑफ ओमान में अमेरिकी नेवी ने दो जहाजों पर हमले किए। 8 जून को Palau-झंडे वाले MT Marivex पर हमला हुआ, जहां से 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने सुरक्षित बचाया। इसके बाद 10 जून को MT Settebello नाम के ऑयल टैंकर पर हमला हुआ। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मरने वालों के नाम इस प्रकार हैं:
- आदित्य शर्मा (डेक कैडेट)
- शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर)
- पटनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर)
भारत सरकार की कार्रवाई
इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी अधिकारी Marco Rubio से बात की और इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत सरकार ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स Jason Meeks को दो बार तलब किया है। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी नाविकों की मौत की पुष्टि की है। भारत सरकार ने कहा है कि कमर्शियल शिपिंग पर ऐसे घातक हमले बिल्कुल भी सही नहीं हैं और यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा है।
अमेरिका ने क्या तर्क दिया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले का बचाव किया है। अमेरिका का कहना है कि MT Settebello जहाज उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ईरानी तेल पर लगाए गए नाकाबंदी के नियमों का उल्लंघन कर रहा था। बताया गया है कि अमेरिका अप्रैल से ही ईरान से जुड़े जहाजों के खिलाफ यह अभियान चला रहा है।
परिवारों को मदद और वापसी
भारत सरकार ने भरोसा दिया है कि वह मृतक नाविकों के परिजनों की पूरी मदद करेगी। सरकार बचे हुए क्रू सदस्यों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने और मृतकों के शवों को सम्मान के साथ वापस लाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
