Strait of Hormuz: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से साफ की सारी बारूदी सुरंगें, ईरान को दी कड़ी चेतावनी.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 25 August 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना यानी US Navy ने होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय पानी में मौजूद सभी बारूदी सुरंगों को सफलता के साथ हटा दिया है और कुछ को नष्ट कर दिया है। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social के जरिए साझा की है। इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार इस क्षेत्र में भविष्य में किसी भी तरह की बारूदी सुरंग बिछाए जाने की घटना पर 'शून्यता की नीति' यानी Zero Tolerance policy पर काम कर रही है।
ईरान को सीधी और कड़ी चेतावनी
अपने आधिकारिक बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर Iran को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में जलमार्ग में कोई भी जहाज या नाव नई बारूदी सुरंग बिछाते हुए पकड़ी गई, तो उसे बिना किसी देरी के पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी अंतरिक्ष बल यानी U.S. Space Force इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर एक इंच पर लगातार नजर बनाए हुए है। समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका पूरी दुनिया के लिए बहुत संवेदनशील माना जाता है।
एक हफ्ते में दूसरी बार सामने आया ऐसा दावा
यह दूसरी बार है जब एक ही हफ्ते के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सामरिक मार्ग से बारूदी सुरंगों को साफ करने का दावा किया है। इससे पहले भी तनाव की स्थिति बनी हुई थी जब ईरान के बलों पर एक तेल टैंकर पर हमला करने का आरोप लगा था। यह घटना अमेरिका की तरफ से ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने के कुछ ही घंटों बाद सामने आई थी, जिसे अधिकारियों ने 'आर्थिक डी-डे' यानी Economic D-Day ऑपरेशन का नाम दिया था। इन तमाम घटनाक्रमों की वजह से खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया था।
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों का किया विरोध
अमेरिका की तरफ से लगाए गए इन आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया है। बीजिंग का कहना है कि इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी United Nations Security Council के किसी आदेश के बिना उठाए जा रहे हैं। चीन ने आर्थिक युद्ध के तरीकों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में रुकावट पैदा होती है। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है।