अमेरिका ने अपने शक्तिशाली विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush (CVN-77) को मिडिल ईस्ट भेजने का फैसला किया है। 28 मार्च 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, यह जंगी जहाज वर्जीनिया से रवाना हो चुका है और अगले 10 से 12 दिनों में इस इलाके में अपनी स्थिति संभाल लेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत और मौजूदगी को और अधिक मजबूत करना है।

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आखिर क्यों अचानक भेजा जा रहा है यह बड़ा जंगी जहाज?

मिडिल ईस्ट में तैनात एक अन्य अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford में आग लगने की वजह से उसे मरम्मत के लिए ग्रीस के सूडा बे जाना पड़ा है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए USS George H.W. Bush को तुरंत रवाना किया गया है। इसके अलावा, ईरान के साथ जारी संघर्ष और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे अच्छी सेना है और वह अपने लक्ष्यों को पूरा करेगी।

USS George H.W. Bush की ताकत और साथ चलने वाले अन्य जहाज

जहाज/यूनिट का नाम विशेषता/भूमिका
USS George H.W. Bush (CVN-77) परमाणु ऊर्जा से चलने वाला कैरियर, 80 विमान ले जाने की क्षमता
USS Ross, USS Donald Cook मिसाइल गाइडेड डिस्ट्रॉयर जो सुरक्षा बेड़े का हिस्सा हैं
USS Mason (DDG-87) दुश्मन की मिसाइलों को रोकने में सक्षम आधुनिक जहाज
Carrier Strike Group 10 जहाजों का पूरा समूह जो युद्ध के लिए तैयार है

मिडिल ईस्ट के हालातों पर क्या होगा इसका असर?

इस जंगी बेड़े के आने से समुद्री इलाके में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की पहुंच काफी बढ़ जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिका के पास कुल तीन विमानवाहक पोत मौजूद हो सकते हैं। इससे ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य रणनीति को और बल मिलेगा। जहाज ने अपनी रवानगी से पहले 5 मार्च 2026 को अपनी अंतिम ट्रेनिंग पूरी की थी, जिससे यह स्पष्ट है कि यह पूरी तरह से युद्ध की स्थिति के लिए तैयार होकर आ रहा है। यह तैनाती क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।