अमेरिका की नेवी ने ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकरों को वापस जाने पर मजबूर कर दिया है. यह कार्रवाई सोमवार से शुरू हुई है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है, जिससे पूरे इलाके में भारी तनाव पैदा हो गया है.

👉: ओमान के सुल्तान और कतर के अमीर के बीच फोन पर बात, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री रास्तों को लेकर हुई चर्चा

अमेरिका ने यह नाकेबंदी क्यों की और इसके नियम क्या हैं?

US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि यह नाकेबंदी उन सभी जहाजों के लिए है जो ईरान के बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं. इसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी पोर्ट शामिल हैं. हालांकि, जो जहाज दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए जा रहे हैं, उन्हें रास्ता दिया जाएगा. खाने-पीने और दवाइयों के सामान को जांच के बाद जाने की अनुमति होगी. उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि इस्लामाबाद में शांति बातचीत फेल हो गई क्योंकि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम बंद करने से मना कर दिया.

इस सैन्य ऑपरेशन की पूरी जानकारी क्या है?

इस बड़े ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने भारी ताकत तैनात की है. इसमें युद्धपोत और विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है. Rich Starry जैसे कई टैंकरों को यू-टर्न लेकर वापस जाना पड़ा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब खत्म होने के करीब है. दूसरी तरफ ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताया है और चेतावनी दी है कि अगर यह जारी रहा तो खाड़ी के कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेंगे.

विवरण जानकारी
तैनात सैनिक 10,000 से ज्यादा
युद्धपोत एक दर्जन से ज्यादा
वापस मोड़े गए टैंकर कम से कम 8
नाकेबंदी की शुरुआत 13 अप्रैल 2026
प्रतिबंध छूट की अंतिम तारीख 19 अप्रैल 2026
मुख्य सैन्य बल US Navy और CENTCOM

आगे क्या होने वाला है और इसका असर क्या होगा?

अमेरिका ने ऐलान किया है कि वह ईरानी तेल पर दी गई 30 दिनों की छूट को 19 अप्रैल 2026 को खत्म कर देगा. इससे ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी नाकेबंदी को युद्ध की कार्रवाई माना जाता है. यह कदम चीन पर दबाव बनाने के लिए भी हो सकता है क्योंकि वह ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है.