ईरान पर अमेरिकी नौसेना की बड़ी कार्रवाई, बंदरगाहों की हुई नाकाबंदी, कई जहाजों को वापस लौटने पर किया मजबूर
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और तटों की पूरी तरह से घेराबंदी कर दी है. अमेरिकी नौसेना ने अब तक कई जहाजों को रोका है और उन्हें वापस जाने के निर्देश दिए हैं. इस कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है और अमेरिकी सेना ने भारी मात्रा में युद्धपोत और विमान तैनात किए हैं.
अमेरिकी नौसेना ने क्या नियम लागू किए हैं?
यह नाकाबंदी 13 अप्रैल 2026 को शाम 5:30 बजे से शुरू हुई है. इसका मतलब है कि कोई भी जहाज ईरान के बंदरगाहों में न तो घुस सकेगा और न ही वहां से बाहर निकल पाएगा. अमेरिकी नौसेना किसी भी देश के जहाज को रोक सकती है, उसकी तलाशी ले सकती है और ज़रूरत पड़ने पर उसे जब्त भी कर सकती है. हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अन्य बंदरगाहों के लिए खुला रखा गया है ताकि बाकी देशों का व्यापार न रुके. अगर चेतावनियों को नहीं माना गया तो बल प्रयोग किया जाएगा.
इस ऑपरेशन में कौन शामिल है और क्या है ईरान का जवाब?
इस बड़े ऑपरेशन का आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है. इसमें USS अब्राहम लिंकन और USS स्प्रुआंस जैसे बड़े युद्धपोत अहम भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि नियमों को तोड़ने वाले जहाजों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. दूसरी तरफ ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने कहा है कि यह नाकाबंदी नाकाम होगी और ईरान की सेना किसी भी खतरे का जवाबी कार्रवाई से सामना करने के लिए तैयार है.
ऑपरेशन से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुरुआत की तारीख | 13 अप्रैल, 2026 |
| तैनात सैनिक | 10,000 से ज़्यादा |
| युद्धपोत और विमान | 12 से ज़्यादा जहाज़ और 100 से ज़्यादा विमान |
| रोके गए जहाज | 10 से 21 जहाजों को वापस मोड़ा गया |
| मुख्य लक्ष्य | ईरानी पोर्ट्स और अवैध तेल जहाज (गोस्ट फ्लीट) |
अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम भी शुरू कर दिया है. इस तनाव के कारण क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पहले के मुकाबले बहुत कम हो गई है. इस ऑपरेशन में एक चीनी तेल टैंकर को भी रोका गया था.