अमेरिका और ईरान के बीच समुद्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की है, जिससे अब वहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है। इस वजह से भारत और खाड़ी देशों के जहाजों पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

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अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी क्यों की और कितने जहाज प्रभावित हुए?

US Central Command (CENTCOM) ने 19 मई 2026 को जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने 88 व्यापारिक जहाजों को मोड़ा है और 4 जहाजों को रोक दिया है ताकि वे नाकेबंदी के नियमों का पालन करें। अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नाकेबंदी शुरू की थी। यह कदम इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होने के बाद उठाया गया। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को टोल वसूलने से रोकना चाहता है और समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी बहाल करना चाहता है।

किन देशों के जहाजों पर असर है और क्या है मौजूदा हाल?

इस नाकेबंदी की वजह से भारत, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन, वियतनाम और दक्षिण कोरिया के व्यापारिक जहाजों को परेशानी हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 63 तेल टैंकर अभी भी अमेरिकी नाकेबंदी की सीमा के अंदर काम कर रहे हैं। 10 मई को “Agios Fanourios I” नाम के टैंकर को पहले ईरान के IRGC और फिर अमेरिकी नौसेना ने रोका था। समुद्र में सुरक्षा कारणों से अब बहुत से जहाज होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास इंतजार कर रहे हैं और वहां जहाजों की भीड़ बढ़ गई है।

क्या होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाज रुकेंगे?

अमेरिका ने साफ किया है कि नाकेबंदी केवल उन जहाजों के लिए है जो ईरान के बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। जो जहाज केवल रास्ते के तौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरकर किसी तीसरे देश जा रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। ईरान ने फरवरी 2026 के अंत में इस रास्ते को बंद करने का ऐलान किया था, जिसे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का उल्लंघन मानता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने जहाजों को क्यों रोका?

CENTCOM के मुताबिक, यह ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का हिस्सा है ताकि ईरान टोल वसूल न कर सके और समुद्र में जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे।

भारतीय जहाजों पर इसका क्या असर है?

भारत सहित UAE और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के व्यापारिक जहाज इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं और कई जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।