अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले रोके, अब आर्थिक प्रतिबंधों और नौसेना की सख्ती पर जोर

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने सहयोगियों को जानकारी दी है कि वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों को फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के बाद अब अमेरिका का पूरा ध्यान आर्थिक दबाव बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना की तैनाती मजबूत करने पर है। हालांकि, अगर ईरान की तरफ से आगे कोई आक्रामकता दिखाई जाती है, तो सैन्य विकल्प अभी भी खुले रखे गए हैं। अमेरिका इस समय कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें पाकिस्तान के जरिए पर्दे के पीछे चल रही मध्यस्थता भी शामिल है। इसके साथ ही क्षेत्रीय राजनयिक कर्मियों को भी धीरे-धीरे वापस बुलाया जा रहा है। नीति में किया गया यह बदलाव इस साल नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के खत्म होने तक प्रभावी रहने की उम्मीद है।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट की शुरुआत
रणनीतिक बदलाव का यह कदम 25 अगस्त 2026 को शुरू किए गए "Operation Economic Outcast" के बाद उठाया गया है। यह ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के नेतृत्व में चलाया जा रहा एक बड़ा प्रतिबंध अभियान है। अधिकारियों ने इसे आर्थिक डी-डे करार दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य तेहरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग करना है। इसके तहत विमानन, शिपिंग, सोना, तकनीक और डिजिटल संपत्तियों से जुड़े लगभग 60 संगठनों, व्यक्तियों और जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद ईरान के आर्थिक रास्तों को काटना है ताकि उसे बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर किया जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक बारूदी सुरंगे हटाई गईं
राष्ट्रपति Donald Trump ने 25 अगस्त को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नौसैनिक बारूदी सुरंगों से पूरी तरह साफ कर दिया है। अब इस जलमार्ग की निगरानी अमेरिकी स्पेस फोर्स द्वारा की जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ज़ीरो टॉलरेंस की चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जो भी जहाज नई बारूदी सुरंगे बिछाने की कोशिश करेगा, उसे तुरंत और पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह जलमार्ग अब पूरी तरह से अमेरिकी नियंत्रण में है, जिसके कारण ईरान के तेल निर्यात पर बहुत असर पड़ा है और उसमें भारी कमी आई है।
ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 26 अगस्त को इन प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए इसे सरासर गैर-कानूनी और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। तेहरान ने चेतावनी दी कि उसके बुनियादी ढांचे को किसी भी तरह की धमकी मिलने पर अमेरिकी ऊर्जा चौकियों और महत्वपूर्ण हितों को निशाना बनाकर भारी हमले किए जाएंगे। इस तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद फ्रांस और सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित नेविगेशन फीस का विरोध किया है। वहीं, चीन अभी भी ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक युद्ध की तरफ यह झुकाव इस अमेरिकी आकलन को दिखाता है कि सैन्य ताकत से कोई निर्णायक जीत हासिल नहीं हुई है।