मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए पेंटागन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। 19 जुलाई 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अपने फाइटर जेट्स और सपोर्ट एयरक्राफ्ट की संख्या में भारी बढ़ोतरी की है, ताकि किसी भी संभावित हमले का जवाब तेजी से दिया जा सके।
ℹ: ईरान के डार्कहोविन परमाणु संयंत्र पर अमेरिका का हमला, तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों में चिंता।
सैन्य तैयारी और तैनाती
अमेरिका ने जर्मनी से F-16 और ब्रिटेन से F-35 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले विमान जैसे KC-135 Stratotankers और KC-46 Pegasuses को भी भेजा गया है। अमेरिकी सेना की योजना कुल 100 रिफ्यूलिंग विमान इजरायली सैन्य ठिकानों पर तैनात करने की है, जिनमें से 14 विमान पिछले वीकेंड तक इजरायल पहुंच चुके हैं। ये विमान इजरायल के IDF बेस, रेमन एयरपोर्ट और ओवदा एयरबेस पर रखे गए हैं।
तनाव का कारण
अमेरिका का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं ताकि अपने हितों की रक्षा की जा सके। इससे पहले शुक्रवार को ईरान के हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, 17 जुलाई तक लगातार सात दिनों से अमेरिका ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है, जिनका उद्देश्य ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपनी गतिविधियों को नहीं रोकता है तो स्थिति बड़े संघर्ष में बदल सकती है।
