अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार, 21 मार्च 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री को मंजूरी दे दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने बताया कि यह एक सीमित समय के लिए दी गई विशेष अनुमति है, जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की सप्लाई को स्थिर करना और कीमतों पर दबाव को कम करना है। इस फैसले से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने की उम्मीद है जिससे तेल की किल्लत दूर होगी।

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तेल की बिक्री और समय सीमा को लेकर क्या हैं नियम?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत केवल उन्हीं शिपमेंट को बेचने की अनुमति दी गई है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद हैं।

  • यह अनुमति केवल उन जहाजों के लिए है जिन पर 20 मार्च 2026 को रात 12:01 बजे से पहले तेल लोड किया जा चुका था।
  • यह विशेष छूट 19 अप्रैल 2026 को रात 12:01 बजे तक ही वैध रहेगी।
  • नियमों के अनुसार नए तेल की खरीद या नए उत्पादन पर पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी।
  • इस आदेश के तहत ईरानी मूल के तेल को खास शर्तों के साथ अमेरिका में आयात करने की भी अनुमति मिली है।

आम आदमी और ग्लोबल मार्केट पर क्या होगा असर?

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी कि चीन वर्तमान में प्रतिबंधित ईरानी तेल को सस्ते दामों पर जमा कर रहा है। अमेरिका की योजना ‘Operation Epic Fury’ के जरिए इस तेल को खुले बाजार में लाकर कीमतों को नीचे लाने की है। सरकार का मानना है कि इस कदम से ईरान को मिलने वाले रेवेन्यू पर लगाम लगेगी क्योंकि अमेरिका उसके बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बनाए रखेगा। इस फैसले का सीधा असर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.