अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामानों पर नए टैक्स (टैरिफ) लगाने का एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) के दावों के बाद लाया गया है, जिससे भारत के कपड़ा और परिधान सेक्टर पर बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। भारतीय कपड़ा उद्योग संघ (CITI) ने अमेरिका के इन आरोपों को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है।
क्या है अमेरिका का नया प्रस्ताव और भारत पर इसका क्या असर होगा?
अमेरिका के इस नए कदम से भारतीय निर्यातकों को तगड़ा झटका लगने की आशंका है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने मार्च 2026 में अपनी जांच शुरू की थी, जिसके बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। अमेरिकी एजेंसी का कहना है कि भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं जबरन श्रम से बने सामानों को रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठा रही हैं। इसके तहत जिन देशों का अमेरिका के साथ विशेष समझौता नहीं है, उन पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाने की योजना है।
आंकड़ों की नजर से समझिए कितना बड़ा है नुकसान
भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। पिछले साल भारत ने जितने कपड़ों का विदेशों में निर्यात किया था, उसका एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में गया था। नए टैक्स लागू होने से भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछड़ सकती हैं और उन्हें अपने पुराने ग्राहक खोने पड़ सकते हैं।
| विवरण (Details) | आंकड़े (Data / Tariffs) |
|---|---|
| भारत का कुल वार्षिक कपड़ा निर्यात | 36 अरब डॉलर |
| अकेले अमेरिका को होने वाला निर्यात | 11 अरब डॉलर |
| भारत जैसे देशों पर प्रस्तावित नया टैक्स | 12.5% |
| आपसी समझौता रखने वाले देशों पर टैक्स | 10% |
भारत सरकार और CITI का इस मामले पर क्या कहना है?
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा है कि अमेरिका का यह आरोप पूरी तरह से गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी अतिरिक्त टैक्स भारतीय कपड़ा निर्यात को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और इससे कंपनियों को भारी घाटा होगा। वहीं दूसरी तरफ, भारतीय वाणिज्य मंत्रालय भी इस मसले को सुलझाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और देश का पक्ष मजबूती से रख रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका भारत के कपड़ा निर्यात पर कितना अतिरिक्त टैक्स लगाने जा रहा है?
अमेरिका उन देशों पर 12.5% तक का अतिरिक्त टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है जिनके साथ उसका कोई विशेष द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं है, जिसमें भारत भी शामिल है।
इस नए टैक्स प्रस्ताव पर भारतीय कपड़ा उद्योग की क्या प्रतिक्रिया है?
भारतीय कपड़ा उद्योग संघ (CITI) के चेयरमैन ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह गलत और अनुचित करार दिया है। उनका कहना है कि इस फैसले से भारतीय टेक्सटाइल निर्यात को भारी नुकसान पहुंचेगा।
