अमेरिका ने एक टैंकर से पकड़े गए 22 ईरानी नाविकों को रिहा कर दिया है. इन सभी नाविकों को पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित ईरानी दूतावास को सौंप दिया गया. यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक खास समझौते के बाद लिया गया है, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई.
समझौते के बाद हुई रिहाई
यह पूरी प्रक्रिया ईरान और अमेरिका के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते का हिस्सा है. इस समझौते पर 18 जून 2026 को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कई मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और ईरान पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने पर सहमति जताई थी.
टैंकर को पकड़ने का मामला
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशहाक डार ने बताया कि पकड़ा गया टैंकर M/T Davina (जिसे Lenore भी कहा जाता है) था. इसे अमेरिकी सेना ने 4-5 जून 2026 के आसपास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र से जब्त किया था. ईरान ने उस समय इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया था और इसे अमेरिका की दबाव बनाने वाली रणनीति करार दिया था.
अधिकारियों ने क्या कहा
- IRNA न्यूज़ एजेंसी: सबसे पहले नाविकों को पाकिस्तान में ईरान के दूतावास सौंपने की खबर दी.
- ईरानी दूतावास (कराची): नाविकों के पहुंचने की पुष्टि की और बताया कि वे आने वाले कुछ दिनों में ईरान लौट जाएंगे.
- इशहाक डार (पाकिस्तानी विदेश मंत्री): X पर पोस्ट के जरिए बताया कि पाकिस्तान नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए काम कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो महीनों में पाकिस्तान के जरिए 70 से ज्यादा ईरानी नाविकों को उनके देश भेजा गया है, और यह चौथा ग्रुप था.
- अमेरिकी अधिकारी: इस रिहाई को एक “भरोसा बनाने वाले कदम” (confidence-building measure) के रूप में देखा है.
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव 28 फरवरी 2026 को तब बढ़ा था जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे. इसके बाद अमेरिका ने ईरानी तेल शिपमेंट पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी थी, जिसे अब धीरे-धीरे हटाया जा रहा है.
