अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% ट्रांजिट शुल्क लगाने का अपना विवादास्पद फैसला वापस ले लिया है। 14 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी गई कि खाड़ी देशों के नेतृत्व के साथ हुई सफल बातचीत के बाद इस शुल्क को हटाकर अब वहां निवेश और व्यापार समझौतों पर ध्यान दिया जाएगा। यह प्रस्ताव केवल एक दिन पहले ही पेश किया गया था, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर काफी विरोध हुआ था।

ईरानी जहाजों पर पूर्ण नाकेबंदी जारी

शुल्क हटाने के बावजूद, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान से आने-जाने वाले या ईरानी माल ले जाने वाले जहाजों पर पूर्ण नाकेबंदी (FULL Blockade) लागू रखेंगे। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और समुद्री कानून विशेषज्ञों ने पहले ही इस प्रस्तावित शुल्क को अवैध और हानिकारक बताया था। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी इस बात पर जोर दिया था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर कोई देश टोल या शुल्क नहीं लगा सकता है।

कानूनी विवाद और वर्तमान स्थिति

हालांकि अमेरिका और ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) की पुष्टि नहीं की है, फिर भी खुले समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी के सिद्धांत वहां लागू माने जाते हैं। इससे पहले 17 जून 2026 को हुआ ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’, जिसके तहत ईरान ने 60 दिनों तक सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया था, अब तनाव बढ़ने के कारण कमजोर पड़ चुका है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी इस 20% शुल्क को बहुत ज्यादा बताया था, जिसके बाद अब इस स्थिति पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.