अमेरिकी सीनेटरों ने रूस के खिलाफ एक नया और सख्त कानून पेश किया है, जिससे दुनिया के कई बड़े देशों की चिंता बढ़ गई है। इस कानून का मुख्य मकसद रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर लगाम लगाना है ताकि रूस की कमाई कम हो सके और यूक्रेन युद्ध का पैसा रुक सके। 14 जुलाई 2026 को पेश किए गए इस प्रस्ताव में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है।
भारत के लिए क्या है स्थिति
इस प्रस्तावित कानून के दायरे में रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा खरीदने वाले पांच देश शामिल हैं, जिनमें भारत और चीन का नाम सबसे ऊपर है। हालांकि, भारत के लिए पहले से ही राहत देने वाली अमेरिकी ट्रेजरी की छूट 17 जून 2026 को खत्म हो चुकी है। इस बिल में उन देशों के लिए राहत का प्रावधान भी है जो अपनी गैस जरूरत का 15 प्रतिशत से कम हिस्सा रूस से लेते हैं और उस पर निर्भरता कम कर रहे हैं।
बिल की मुख्य बातें
- रूस के शैडो टैंकर्स, सेंट्रल बैंक और प्रमुख गैस प्रोजेक्ट्स जैसे Yamal LNG और Arctic LNG को निशाना बनाया गया है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास यह अधिकार होगा कि अगर अमेरिका के हित में जरूरी हो, तो वे इन प्रतिबंधों में छूट दे सकें।
- यह कानून व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद लाया गया है, हालांकि इसमें पहले 500 प्रतिशत का भारी टैक्स प्रस्ताव था जिसे अब घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है।
