अमेरिका ने चीन की बड़ी तेल रिफाइनरी Hengli Petrochemical और करीब 40 शिपिंग कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. यह कार्रवाई ईरान के साथ गुप्त तेल व्यापार को रोकने के लिए की गई है. हालांकि चीनी कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है और कहा है कि उसने कभी ईरान से तेल नहीं खरीदा.
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अमेरिका ने क्यों लगाए ये प्रतिबंध और क्या है पूरा मामला
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने 24 अप्रैल, 2026 को ये प्रतिबंध घोषित किए. अमेरिका का कहना है कि Hengli Petrochemical 2023 से ईरान का कच्चा तेल खरीद रही थी, जिससे ईरानी सेना को करोड़ों डॉलर का फायदा हुआ. ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि इस कदम से ईरानी शासन की वित्तीय ताकत कम होगी और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगेगी. अमेरिका ने Sepehr Energy Jahan Nama Pars Company जैसी संस्थाओं का नाम भी लिया है जिसके जरिए तेल की खेप भेजी गई.
चीनी कंपनी का क्या कहना है और इसका क्या असर होगा
Hengli Petrochemical ने इन आरोपों को तथ्यहीन और कानूनी आधार से रहित बताया है. कंपनी का कहना है कि उसके सभी सप्लायर्स ने गारंटी दी थी कि सप्लाई किया गया कच्चा तेल अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आता. कंपनी ने यह भी साफ किया कि उसके पास 3 महीने से ज्यादा उत्पादन के लिए पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है, इसलिए उसकी खरीद प्रक्रिया और काम पर कोई असर नहीं पड़ा है. दूसरी ओर, चीन के दूतावास ने इसे अमेरिका का गलत कदम बताते हुए इसे अवैध एकतरफा प्रतिबंध कहा है.
ईरान-चीन तेल व्यापार और प्रतिबंधों की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रतिबंध की तारीख | 24 अप्रैल, 2026 |
| मुख्य कंपनी | Hengli Petrochemical (Dalian) |
| लक्षित संस्थाएं | लगभग 40 शिपिंग कंपनियां और टैंकर |
| 2025 का डेटा | चीन ने ईरान के 80% से ज्यादा शिप किए गए तेल की खरीद की |
| अमेरिकी कार्रवाई | स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की भौतिक नाकेबंदी की गई |
| सरकारी आदेश | कार्यकारी आदेश (ई.ओ.) 13902 के तहत कार्रवाई |