अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक गुस्सा) मुहिम के तहत एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। 5 जून 2026 को अमेरिकी सरकार ने एक ऐसे बड़े नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा दिया है जो ईरान की एलपीजी (गैस) को ओमान का बताकर दुनिया भर में बेच रहा था। इस कार्रवाई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कुछ कंपनियों और कई जहाजों को भी निशाना बनाया गया है, जो ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहे थे।

ईरान का गैस नेटवर्क कैसे करता था काम?

अमेरिका के वित्त विभाग (Treasury Department) ने बताया कि यह नेटवर्क ईरान की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) को चोरी-छिपे ओमान के रास्ते दूसरे देशों में भेजता था। इस काम के लिए फर्जी कंपनियों और ‘शैडो फ्लीट’ (गुमनाम जहाजों) का सहारा लिया जाता था ताकि कोई पकड़ न सके।

  • इस नेटवर्क को अफगान नागरिक Sarbaz Abdul Zada और तुर्की के Mohammad Shakol Mihandoust संभाल रहे थे।
  • यूएई (UAE) की तीन कंपनियां – Butani Trading LLC, Dundlod Trading FZE और ADH Energy FZE इस खेल में शामिल थीं, जिन पर अब बैन लगा दिया गया है।
  • कुल 6 समुद्री जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनमें LPG SEVAN और GAS ZEINA शामिल हैं। इनमें से चार जहाज पनामा के झंडे के साथ चल रहे थे।

मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक खातों पर भी कसा शिकंजा

इस कार्रवाई में केवल गैस बेचने वाले ही नहीं, बल्कि पैसे का हेरफेर करने वाले एक्सचेंज हाउस भी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार ने ईरान के ‘गेरामियन एक्सचेंज’ (Mehrdad Geramian Nik and Partners Company) पर भी प्रतिबंध लगाया है।

  • यह एक्सचेंज हाउस ईरान के प्रतिबंधित बैंकों जैसे ‘बैंक तेजारत’, ‘बैंक मेल्लत’ और ‘बैंक पासरगाड’ के लिए पैसे ट्रांसफर करने का काम करता था।
  • इस एक्सचेंज को चलाने वाले ईरानी नागरिक Mehrdad Geramian Nik और Romina Geramian Nik पर सीधा एक्शन लिया गया है।
  • अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में MT Davina नाम के एक प्रतिबंधित जहाज को भी कब्जे में लिया है, जो अक्टूबर 2024 से ही बैन लिस्ट में था और अवैध रूप से तेल सप्लाई कर रहा था।

अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। हम ईरान के इस गुप्त बैंकिंग नेटवर्क और जहाजों के जरिए होने वाले अवैध व्यापार को पूरी तरह से बंद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने साफ किया कि जो भी विदेशी कंपनियां ईरान की मदद करेंगी, उन्हें भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान पर यह कार्रवाई कब और क्यों की?

अमेरिका ने यह कार्रवाई 5 जून 2026 को की। इसका मुख्य कारण ईरान द्वारा ओमान के नाम पर अवैध रूप से एलपीजी गैस बेचना और प्रतिबंधित बैंकों के लिए पैसे का लेन-देन करना था।

इस प्रतिबंध में कौन सी प्रमुख कंपनियां और देश शामिल हैं?

इसमें ईरान के अलावा यूएई और चीन की फर्जी कंपनियां शामिल हैं। यूएई की बुटानी ट्रेडिंग और डंडलोद ट्रेडिंग जैसी कंपनियों के साथ-साथ कई समुद्री जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.