इराक के दियाला प्रांत में बुधवार 29 जुलाई 2026 को अमेरिका और सऊदी अरब द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इस कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 4 सदस्य मारे गए हैं। ये सभी जवान काशान, इस्फ़हान प्रांत के रहने वाले थे, जिनकी पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोफ़ज़ल मोटाकी, मोर्टेज़ा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफ़ोरौश के रूप में हुई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ये जवान आगामी अरबैन तीर्थयात्रा की सुरक्षा में तैनात थे।
हमले का कारण और जमीनी स्थिति
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कार्रवाई को पूर्वी इराक में ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ प्रिसिजन स्ट्राइक बताया है। अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में अमेरिकी बलों और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर 30 से अधिक ड्रोन हमले किए गए थे, जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का हिस्सा बताया है।
इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) ने जानकारी दी है कि दियाला, बगदाद, वासित, निनवेह, बसरा, किरकुक और करबला जैसे प्रांतों में उनके कम से कम 20 सदस्य मारे गए हैं और 32 लोग घायल हुए हैं।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
इराक की सरकार ने इस हमले को देश की संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है और प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सऊदी अरब की अपनी प्रस्तावित यात्रा को स्थगित कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अमानवीय और आक्रामक कार्रवाई बताते हुए कड़ी निंदा की है। अरबैन तीर्थयात्रा के लिए 5 अगस्त के आसपास का समय तय है और इस सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
