अमेरिका और सऊदी अरब ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत सऊदी अरब अब अमेरिकी तकनीक और विशेषज्ञता की मदद से अपने देश में परमाणु रिएक्टर बना सकेगा। यह करार अगले 30 सालों तक प्रभावी रहेगा।

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समझौते की मुख्य बातें

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright और सऊदी मंत्री Prince Abdulaziz bin Salman ने इस 123 समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सऊदी अरब भविष्य में अपने देश में यूरेनियम का संवर्धन (enrichment) कर सकता है, हालांकि इसके लिए दो साल तक चलने वाले एक संयुक्त अध्ययन में इसकी जरूरत साबित करनी होगी।

विवाद और सुरक्षा को लेकर चिंताएं

इस डील के सामने आते ही इसराइल ने कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व इसराइली प्रधानमंत्री Naftali Bennett का कहना है कि यह समझौता मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। आलोचकों का यह भी मानना है कि इस डील में IAEA के कड़े सुरक्षा मानकों यानी ‘Additional Protocol’ की कमी है।

सऊदी अरब ने इस डील के लिए इसराइल के साथ औपचारिक संबंध जोड़ने की शर्त नहीं रखी है। फिलहाल, अमेरिकी सरकार इस समझौते को समीक्षा के लिए कांग्रेस के पास भेजेगी, जहां इसे मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.