बुधवार, 29 जुलाई 2026 को अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर एक साथ सटीक हमले किए। इन हवाई हमलों में 20 लड़ाकों की जान चली गई और 32 लोग घायल हो गए। ये हमले Nineveh, Baghdad, Wasit, Basra, Kirkuk, Karbala और Diyala जैसे इलाकों में किए गए, जहाँ मिलिशिया के कई दफ्तर और ठिकाने मौजूद थे।
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हमले की वजह और सरकारी बयान
U.S. Central Command (CENTCOM) ने बताया कि पिछले 72 घंटों में उनके ठिकानों और सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर 30 से ज्यादा ड्रोन से हमले किए गए थे। इन्हीं हमलों के जवाब में अमेरिका और सऊदी सेना ने संयुक्त कार्रवाई की है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनके तेल संयंत्रों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया।
विवाद और आगे की स्थिति
Popular Mobilization Forces (PMF) ने इन हमलों को इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और इसे एक खतरनाक कदम कहा है। दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों से किसी भी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है। अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान समर्थित समूहों ने हमले बंद नहीं किए, तो भविष्य में और भी कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सऊदी अरब का कहना है कि वे तनाव नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
