अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि तेहरान के साथ बातचीत अभी चल रही है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं। अमेरिका किसी भी स्थिति में कोई खराब डील स्वीकार नहीं करेगा। इस बातचीत को खाड़ी देशों के सहयोगियों का भी समर्थन मिल रहा है और इसे दुनिया के लिए सही दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में क्या है खास?

इस समझौते को लेकर चल रही बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) के स्टॉक को सौंपने पर चर्चा हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान किस तरीके से अपना यूरेनियम सौंपेगा, इस विषय पर अगले 60 दिनों के भीतर बातचीत की जाएगी। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका या तो एक अच्छा समझौता करेगा या फिर इस मुद्दे से निपटने के लिए दूसरा रास्ता अपनाएगा।

डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति का क्या है रुख?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता और उस पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी। उन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे इस बार कोई ढील नहीं देंगे। वहीं दूसरी ओर, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने ट्रम्प के उस दावे को खारिज किया है जिसमें उन्होंने समझौते को लगभग पूरा बताया था। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने भी स्पष्ट किया है कि ईरान किसी भी दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता फाइनल हो गया है?

नहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार यह डील अभी प्रक्रिया में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ किया है कि जब तक समझौता पूरी तरह साइन और प्रमाणित नहीं हो जाता, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी।

इस समझौते में किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो रही है?

इस बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को वापस लेने पर चर्चा हो रही है, जिसके तौर-तरीकों पर 60 दिनों की अवधि में बातचीत की जाएगी।