अमेरिका की सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 23 जून 2026 को सीनेट ने एक प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ चल रही लड़ाई से अमेरिकी सेना को हटाने के लिए कहा गया है। इस प्रस्ताव को 50-48 के अंतर से पास किया गया।
इस वोट की एक खास बात यह है कि यह पूरी तरह से प्रतीकात्मक यानी सिम्बोलिक है। 1973 के War Powers Act के तहत, इस तरह के प्रस्ताव को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस नहीं भेजा जाता है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कानून असंवैधानिक है और वे इसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इसे लागू करना एक मुश्किल मामला है जिसे शायद कोर्ट में तय किया जाएगा।
इससे पहले 19 मई 2026 को भी सीनेट ने इसी तरह के एक प्रस्ताव को 50-47 के वोट से आगे बढ़ाया था। उस समय सात कोशिशों के बाद यह पहली बार हुआ था जब ऐसा कोई प्रस्ताव पास हुआ। इस मुहिम में ज्यादातर डेमोक्रेट्स शामिल थे, लेकिन कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी उनका साथ दिया। रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul लंबे समय से ईरान के खिलाफ अकेले सैन्य कार्रवाई का विरोध करते आ रहे हैं।
सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर ने कहा कि डेमोक्रेट्स अब ट्रंप की अवैध जंग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। वहीं सीनेटर टिम केन ने जोर दिया कि युद्ध की घोषणा करना कांग्रेस का संवैधानिक अधिकार है और इस लड़ाई की रणनीति और खर्च पर चर्चा होनी चाहिए। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के स्कॉट एंडरसन के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव ब्रांच इस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर सकती है।
यह पूरा विवाद फरवरी 28 के आसपास शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इन हमलों में कई लोग मारे गए थे, जिसके बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। अब कई अमेरिकी सांसद इस युद्ध की बढ़ती लागत और इसके प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।
