अमेरिका की सीनेट में ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन रोकने की कोशिश नाकाम रही। युद्ध खत्म करने के लिए लाए गए एक प्रस्ताव को वोटिंग में हरा दिया गया। यह नौवीं बार था जब अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप सरकार की सैन्य कार्रवाई को रोकने की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हुए।

इस प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में 47 सदस्य पक्ष में और 48 सदस्य खिलाफ रहे। जॉर्जिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर राफेल वॉर्नॉक ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। उनका मकसद राष्ट्रपति को निर्देश देना था कि अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों से हटाया जाए, जब तक कि कांग्रेस इसकी अनुमति न दे।

वोटिंग का पूरा ब्यौरा

इस प्रस्ताव के समर्थन में लगभग सभी डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी के चार सदस्य यानी सुसान कॉलिन्स, बिल कैसिडी, लिसा मुरकोव्स्की और रैंड पॉल शामिल थे। वहीं, डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन एकमात्र ऐसे डेमोक्रेट थे जिन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया और रिपब्लिकन सदस्यों का साथ दिया।

ट्रंप सरकार और ईरान के बीच डील

एक तरफ जहां सीनेट में बिल फेल हुआ, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता हो गया है। इस मामले में कुछ अहम बातें सामने आई हैं:

  • 14 जून 2026 को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक डिजिटल समझौता (MOU) साइन हुआ।
  • इस समझौते का आधिकारिक दस्तखत 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में होगा।
  • डील के तहत सभी मोर्चों पर युद्धविराम होगा और ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली जाएगी।
  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बात कही गई है।

अमेरिकी प्रशासन ने जानकारी दी है कि बातचीत के अगले 60 दिनों तक मिडिल ईस्ट में सैन्य तैनाती वैसी ही रहेगी जैसी अभी है। वहीं इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने इस डील की आलोचना की है और साफ कहा है कि IDF सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।

बता दें कि यह युद्ध फरवरी 2026 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका और इसराइल शामिल थे। पिछले चार महीनों से चल रही इस जंग के बाद अब इस नए समझौते से तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.