अमेरिका की सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए एक प्रस्ताव पास कर दिया है। अब राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान पर कोई भी नया हमला करने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। 50-48 के वोट से पास हुए इस फैसले ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर नई पाबंदियां लगा दी हैं।

यह वोट मंगलवार, 23 जून 2026 को हुआ। इससे पहले जून 2026 में ही हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भी इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी। इस वोटिंग में चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिनमें Senator Susan Collins, Bill Cassidy, Lisa Murkowski और Rand Paul शामिल थे। वहीं, Senator John Fetterman इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वाले अकेले डेमोक्रेट थे।

नियमों के मुताबिक अब राष्ट्रपति को युद्ध की घोषणा या सैन्य बल के इस्तेमाल की विशेष अनुमति लेनी होगी। यह कदम 1973 के War Powers Resolution के तहत उठाया गया है। क्योंकि इसे कांग्रेस के दोनों सदनों ने पास कर दिया है, इसलिए इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं है।

Senator Tim Kaine ने कहा कि यह फैसला युद्ध घोषित करने की कांग्रेस की शक्ति को फिर से लागू करने के लिए जरूरी था। वहीं, Democratic Leader Chuck Schumer ने इसे प्रशासन की विदेश नीति की बड़ी हार बताया। दूसरी तरफ, Senator James Risch का मानना है कि इस कदम से ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत खराब हो सकती है।

Trump प्रशासन ने इस प्रस्ताव को सिर्फ दिखावे के लिए बताया है और कहा है कि इसका कोई कानूनी असर नहीं होगा। व्हाइट हाउस का मानना है कि War Powers Act असंवैधानिक है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता हुआ है। इस समझौते में ईरान के तेल पर से प्रतिबंध हटाने और उसके पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव है।

पेंटागन ने सांसदों को जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें लगभग 80 अरब डॉलर की जरूरत है।