अमेरिका की सीनेट में एक बड़ा मोड़ आया है। वहां एक ऐसा प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया गया है जिससे राष्ट्रपति Donald Trump बिना संसद की अनुमति के ईरान के खिलाफ सेना का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह कदम ट्रंप प्रशासन की शक्तियों को सीमित करने की एक कोशिश है ताकि युद्ध पर लगाम लगाई जा सके।

सीनेट में क्या हुआ और यह प्रस्ताव क्यों लाया गया?

Senator Tim Kaine ने यह प्रस्ताव पेश किया था। 19 मई 2026 को सीनेट ने 50-47 के वोट से इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस बार चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी इसका समर्थन किया, जिससे यह मामला अब पूरी बहस के लिए तैयार है। इस पूरे मामले में 1973 के War Powers Act का सहारा लिया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रपति द्वारा सेना के इस्तेमाल पर संसद की निगरानी रखना है।

ईरान के साथ युद्ध और ट्रंप प्रशासन का क्या स्टैंड है?

करीब 80 दिन पहले ‘Operation Epic Fury’ नाम से सैन्य कार्रवाई शुरू हुई थी। ट्रंप प्रशासन ने पहले कांग्रेस को बताया था कि हमले खत्म हो गए हैं, लेकिन अमेरिकी सेना अभी भी वहां मौजूद है। राष्ट्रपति Trump का कहना है कि ईरान डील करना चाहता है और यह विवाद जल्दी सुलझ जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर कोई सही समझौता नहीं हुआ, तो वे बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए तैयार हैं।

अब आगे क्या होगा और क्या यह नियम लागू होगा?

यह अभी सिर्फ एक शुरुआती कानूनी प्रक्रिया है। इस प्रस्ताव को पहले सीनेट में पूरी वोटिंग से पास होना होगा और फिर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी लेनी होगी। उम्मीद है कि ट्रंप इस प्रस्ताव को वीटो कर देंगे। अगर ऐसा होता है, तो वीटो को हटाने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान पर हमला नहीं कर सकते?

अभी यह सिर्फ एक प्रक्रिया है। अगर यह प्रस्ताव पूरी तरह पास होकर कानून बन जाता है, तो ट्रंप बिना कांग्रेस की अनुमति के सेना नहीं भेज पाएंगे।

इस प्रस्ताव का समर्थन किन लोगों ने किया?

इसे डेमोक्रेट्स के साथ-साथ रिपब्लिकन सांसदों जैसे बिल कैसिडी, सुसान कॉलिन्स, लिसा मुरकोव्स्की और रैंड पॉल ने समर्थन दिया।