अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर सीनेटर क्रिस मर्फी का बड़ा बयान, ईरान पर उठाए गए कदम को बताया सिर्फ दिखावा.

अमेरिका के राजनीति गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब सीनेटर Chris Murphy ने व्हाइट हाउस की तरफ से ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस पूरे कदम को केवल एक हताशा भरा दिखावा करार दिया है जिसका मकसद अमेरिका की नीतियों की कमियों को छिपाना है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तोड़ा जा सके लेकिन राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर अब विरोध के सुर भी उठने लगे हैं।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट और नए प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटी Scott Bessent ने 24 अगस्त 2026 को एक बड़ा वित्तीय और कूटनीतिक अभियान शुरू करने की घोषणा की थी जिसे Operation Economic Outcast नाम दिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से अलग-थलग करना है ताकि देश की हर उस आर्थिक धुरी को काटा जा सके जो वहां की सरकार को चला रही है। राष्ट्रपति Donald Trump ने यह सख्त निर्देश दिया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा उस पर अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25% का भारी भरकम टैक्स लगाया जाएगा। ट्रेजरी विभाग का यह मानना है कि इस तरह से ईरान की पूरी आर्थिक सांसें रोक दी जाएंगी जिससे भविष्य में किसी भी सैन्य बल के प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
किन सेक्टरों पर कसा गया शिकंजा
सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों के तहत कुल पांच प्रमुख क्षेत्रों को खासतौर पर निशाना बनाया गया है। इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और शासन के करीबी लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी, हथियारों से जुड़ी तकनीक, सोने का इस्तेमाल जो ईरानी मुद्रा को स्थिर रखने के लिए होता है, राष्ट्रीय एयरलाइंस और तेल परिवहन तथा हथियार के पुर्जे ढोने वाले समुद्री जहाज शामिल हैं। इसके अलावा कुल 60 ऐसी संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर रोक लगाई गई है जो साइबर गतिविधियों, मिसाइल या परमाणु तकनीक को जुटाने और तेल बेचने के काम में शामिल बताए गए हैं। अमेरिका इस योजना के समर्थन के लिए दुनिया के कई बड़े देशों के संपर्क में है जिसमें मुख्य व्यापारिक साझेदार जैसे China, Turkey, United Arab Emirates और Iraq शामिल हैं।
सीनेटर का पुराना रुख और आलोचना
सीनेटर Chris Murphy मौजूदा प्रशासन की नीतियों के हमेशा से आलोचक रहे हैं और उन्होंने पहले भी इस पूरे संघर्ष को एक शर्मनाक आपदा बताया था। उनका यह कहना था कि अमेरिका इस समय बहुत ही कमजोर स्थिति से काम कर रहा है। साल 2026 की शुरुआत में भी उन्होंने किसी भी तरह की संभावित बातचीत का विरोध किया था और यह आरोप लगाया था कि अमेरिका बिना ईरान से उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर कोई भी छूट लिए उसे वित्तीय मदद और तेल व्यापार की अनुमति दे सकता है। इन तमाम राजनीतिक उठापटक के बीच खाड़ी देशों और दुनिया भर में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि इन प्रतिबंधों का असर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वहां रहने वाले प्रवासियों पर किस तरह से पड़ेगा।