अमेरिका ने ईरान में सेना भेजने पर दी सफाई, अभी हफ़्तों चलेगा युद्ध, खाड़ी देशों में अलर्ट
अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने वाशिंगटन में साफ़ किया है कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई में अभी अमेरिकी जमीनी सेना यानी ‘boots on the ground’ भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वर्तमान सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सेना उतारने की जरूरत नहीं दिख रही है। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यह युद्ध आज खत्म होने वाला नहीं है और इसके हफ़्तों तक चलने की संभावना है।
अमेरिकी मिशन और सीनेटर ग्राहम के बयान की मुख्य बातें
सीनेटर ग्राहम के अनुसार इस पूरे सैन्य अभियान का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को इस तरह खत्म करना है कि वह दोबारा हमला न कर सके। उन्होंने साफ़ किया कि अमेरिका का इरादा ईरान पर कब्जा करने का नहीं है। मिशन के मुख्य लक्ष्यों में शामिल हैं:
- ईरान को ऐसी मिसाइलें बनाने से रोकना जो अमेरिका तक पहुँच सकें।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करना।
- ईरान के बुनियादी ढांचे को सामरिक रूप से कमजोर करना।
- पेंटागन द्वारा संचालित Operation Epic Fury को प्रभावी ढंग से लागू करना।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव और ताजा अपडेट
पिछले 24 घंटों में इस युद्ध का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में देखा गया है जिससे वहाँ रह रहे प्रवासी भी चिंतित हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी हवाई सीमा में प्रवेश करने वाले दर्जनों ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी है। क्षेत्र में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नीचे दिए गए आंकड़े महत्वपूर्ण हैं:
| विवरण | ताजा जानकारी (13 मार्च 2026) |
|---|---|
| अमेरिकी हताहत | 8 सैनिक मारे गए, 140 घायल हुए |
| ईरानी हमला | IRGC द्वारा 44वीं लहर के तहत ड्रोन और मिसाइल हमले |
| प्रमुख लक्ष्य | Haifa शहर और अमेरिकी Fifth Fleet बेस |
| सऊदी अरब की स्थिति | सीमा पर दर्जनों ड्रोन मार गिराए गए |
| कूटनीतिक रुख | कतर ने लेबनान पर हुए हमलों की निंदा की |
ईरान की ओर से लगातार जवाबी हमले जारी हैं जिससे सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों को सलाह दी जा रही है कि वे आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। फिलहाल तेल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है ताकि भविष्य में अर्थव्यवस्था पर असर न पड़े।





