अमेरिका के 12 डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने इसराइल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इन नेताओं ने अमेरिकी मिलिट्री (CENTCOM) को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि लेबनान और ईरान में लोगों को जबरन हटाने का अभियान क्या अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। यह मामला अब काफी गरमा गया है क्योंकि सीनेटरों ने जवाब के लिए एक समय सीमा तय कर दी है।
सीनेटरों ने मिलिट्री से क्या सवाल पूछे हैं?
सीनेटर पीटर वेल्च के नेतृत्व में 12 नेताओं ने 4 मई 2026 को CENTCOM चीफ एडम ब्रैड कूपर को पत्र भेजा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल जिस तरह से लेबनान और ईरान में लोगों को घर खाली करने की चेतावनी दे रहा है, वह युद्ध के मानवीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
- सीनेटरों का कहना है कि इन चेतावनियों का इस्तेमाल लोगों को हमेशा के लिए बेघर करने और कस्बों को तबाह करने के लिए किया गया।
- पत्र में यह बात कही गई कि कई नागरिक जो घर नहीं छोड़े, उन्हें हमलों में मार दिया गया।
- नेताओं ने स्पष्ट किया कि चेतावनी देने मात्र से मिलिट्री की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, उन्हें यह पक्का करना होगा कि हर निशाना सैन्य लक्ष्य ही हो।
इन सभी सवालों के जवाब सीनेटरों ने 20 मई 2026 तक मांगे हैं, ताकि एडम ब्रैड कूपर अपनी संसदीय गवाही से पहले अपनी बात रख सकें।
लेबनान में हालात और इसराइल का क्या पक्ष है?
17 अप्रैल 2026 से इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच एक युद्धविराम हुआ था, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले अब भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान की आबादी का लगभग छठा हिस्सा, यानी 10 लाख से ज्यादा लोग, घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं। 7 मई 2026 को भी इसराइल ने दक्षिणी लेबनान के 12 गांवों को खाली करने का आदेश दिया था।
इस मामले पर इसराइल की सेना ने पत्र पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन पहले दिए गए बयानों में उन्होंने कहा कि वे फोन, रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी देते हैं। इसराइल का दावा है कि उनके नक्शे नागरिकों को बचाने के लिए होते हैं और हिजबुल्लाह जानबूझकर नागरिक इलाकों में हथियार छिपाकर रखता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिकी सीनेटरों ने CENTCOM चीफ से कब तक जवाब मांगा है?
सीनेटरों ने 4 मई 2026 को पत्र भेजा था और Adm. Brad Cooper से 20 मई 2026 तक जवाब मांगा है।
लेबनान में विस्थापन की स्थिति क्या है?
रिपोर्ट्स के अनुसार लेबनान की आबादी का करीब छठा हिस्सा, यानी 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और दक्षिणी लेबनान के कई गांवों में हमले जारी हैं।