अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने एक बार फिर तेज़ी पकड़ ली है। भले ही दोनों देशों के बीच युद्धबंद (ceasefire) का समझौता हुआ था, लेकिन अमेरिका अब मिडिल ईस्ट में 10,000 से ज़्यादा सैनिक भेज रहा है। इस कदम से पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई है और युद्ध का खतरा फिर से मंडराने लगा है।

अमेरिका सैनिक क्यों भेज रहा है और क्या है ताजा स्थिति?

डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए यह फैसला लिया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान उसके साथ किसी ठोस समझौते पर सहमत हो। अगर 22 अप्रैल तक युद्धबंद की समय सीमा खत्म हो गई और कोई नया समझौता नहीं हुआ, तो ये सैनिक सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। अमेरिकी अधिकारी ने साफ़ किया है कि अभी युद्धबंद को आगे बढ़ाने पर कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है।

समुद्री नाकाबंदी और ईरान की चेतावनी क्या है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 12 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी का ऐलान किया था, जो 13 अप्रैल से लागू हो गई। अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालना और परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। इसके जवाब में ईरान के सैन्य कमांडर मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी है कि अगर यह नाकाबंदी जारी रही, तो ईरान भी लाल सागर, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में व्यापार रोक देगा।

अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और समझौते का ब्यौरा

विवरण जानकारी
कुल अतिरिक्त सैनिक 10,000 से अधिक
USS George H.W. Bush के साथ लगभग 6,000 सैनिक
Boxer Amphibious Ready Group लगभग 4,200 सैनिक
11th Marine Expeditionary Unit Boxer ग्रुप के साथ तैनात
युद्धबंद की समाप्ति तिथि 22 अप्रैल 2026
मध्यस्थ देश पाकिस्तान
नाकाबंदी की शुरुआत 13 अप्रैल 2026