Middle East: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका ने ईरान के उन पैसों के लिए एक खर्च योजना तैयार की है जिन्हें उसने फ्रीज कर रखा था। अमेरिका का कहना है कि वह इस पैसे को तभी छोड़ेगा जब ईरान उसकी शर्तों को मानेगा।

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दोनों देशों के बीच 15 जून 2026 को एक समझौता (MOU) हुआ था, जिसके तहत 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने (ceasefire) और बातचीत का रास्ता खोला गया। इस समझौते के बाद 21 जून से तकनीकी बातचीत भी शुरू हो गई। अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को अनफ्रीज कर देगा, लेकिन इस पर कड़ी शर्तें लगा दी हैं।

अमेरिका की शर्तें और निगरानी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया है कि अनफ्रीज किए गए पैसों का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिकी खेती के सामान जैसे मक्का, गेहूं और सोयाबीन, और मेडिकल सप्लाई खरीदने के लिए किया जाएगा। यह पूरा पैसा अमेरिकी कंट्रोल वाले एस्क्रो खातों में रहेगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने बताया कि इस पूरे लेन-देन पर नजर रखने के लिए अमेरिकी अधिकारी Qatar में तैनात रहेंगे। उनका मकसद यह है कि ईरान के पैसे का एक बड़ा हिस्सा वापस अमेरिकी उत्पादों को खरीदने में खर्च हो। वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह आइडिया Jared Kushner का था, ताकि अमेरिकी किसान अमीर हों और ईरानी लोगों को खाना मिल सके।

ईरान का सख्त इनकार

दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर ने कहा कि ईरान कानूनी तौर पर अमेरिकी सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं है। ईरान का कहना है कि वह इन पैसों का इस्तेमाल दुनिया भर में किसी भी ऐसी चीज़ को खरीदने के लिए करेगा जिस पर प्रतिबंध नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने भी कहा कि ईरान अपने पैसों को अपनी मर्जी से खर्च करेगा।

समझौते की मुख्य बातें

इस पूरे विवाद और बातचीत से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:

विवरण जानकारी
समझौता तिथि (MOU) 15 जून 2026
सीजफायर अवधि 60 दिन
तेल बिक्री छूट 21 अगस्त 2026 तक
पुनर्निर्माण फंड 300 बिलियन डॉलर का प्लान
अमेरिकी शर्त सिर्फ अमेरिकी अनाज और दवाइयां खरीदना
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान टोल टैक्स नहीं वसूल सकेगा

इस बीच, अमेरिका ने इसे ‘पे-फॉर-परफॉर्मेंस’ ढांचा बताया है, जिसका मतलब है कि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा तभी फंड रिलीज किए जाएंगे। हालांकि, इस पूरी कोशिश के बीच इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रही जंग इस शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.