अमेरिका मंगलवार 19 मई 2026 को ईरान पर एक बहुत बड़ा सैन्य हमला करने की तैयारी में था। लेकिन आखिरी समय पर इस हमले को रोक दिया गया। सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की कि बातचीत का एक और मौका दिया जाए क्योंकि शांति समझौते की उम्मीद अभी बाकी है।

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अमेरिका ने हमला क्यों रोका और अब क्या स्थिति है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि खाड़ी देशों के नेताओं की अपील के बाद यह फैसला लिया गया। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी ने मध्यस्थता की कोशिश की है। ईरान की तरफ से पाकिस्तान के जरिए एक नया 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव अमेरिका को भेजा गया है, जिसके बाद कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है।

हालांकि, ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका full-scale assault यानी पूर्ण पैमाने पर हमले के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डेनियल केन को निर्देश दिया है कि वे किसी भी समय हमले के लिए तैयार रहें ताकि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

ईरान का जवाब और ग्लोबल मार्केट पर असर

ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिकी धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी दबाव में नहीं झुकेगी। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने पुष्टि की कि उनका नया प्रस्ताव पाकिस्तान की मदद से वॉशिंगटन पहुंचा दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर तेल बाजार पर दिखा। जैसे ही हमले की खबर रुकी, ग्लोबल ऑयल प्राइसेस में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। UAE, सऊदी अरब और कतर जैसे देश मिडिल ईस्ट में नया युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका अब ईरान पर हमला नहीं करेगा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने फिलहाल हमला रोक दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शांति वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका पूर्ण पैमाने पर हमले के लिए तैयार है।

ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कौन कर रहा है?

सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे खाड़ी देश मध्यस्थता कर रहे हैं, साथ ही पाकिस्तान ने भी ईरान का 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाने में मदद की है।