अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के होर्मुज़गन प्रांत में स्थित सिरिक द्वीप पर एक टेलीकम्यूनिकेशन टावर को निशाना बनाया है। इस हमले में कई लोगों के घायल होने की खबर आई है, जिससे इलाके में डर का माहौल है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला
U.S. Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उन्होंने पिछले सप्ताहांत ईरान के गो रुक और क़ेशम द्वीप पर मौजूद रडार और ड्रोन कमांड-एंड-कंट्रोल साइट्स पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। दरअसल, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिका के एक MQ-1 Reaper ड्रोन को मार गिराया था, जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, उनके फाइटर जेट्स ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और एक ग्राउंड कंट्रोल फैसिलिटी को तबाह कर दिया। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए खतरा बने दो अटैक ड्रोन को भी नष्ट किया गया। अमेरिका ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन में उसके किसी भी सैनिक को चोट नहीं आई है।
ईरान का पलटवार और मौजूदा स्थिति
इस हमले के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाब दिया है। IRGC ने ऐलान किया कि उनकी एरोस्पेस फोर्स ने उस एयर बेस को निशाना बनाया है जहाँ से अमेरिकी ऑपरेशन चलाया गया था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस बेस की सही जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने सिरिक द्वीप पर लोगों के घायल होने की बात कही है, लेकिन बाहरी तौर पर इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। साल 2026 की शुरुआत में हुए हवाई हमलों में अब तक बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं। स्वतंत्र अनुमानों के अनुसार कम से कम 34 लोग मारे गए जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जबकि ईरान का दावा है कि 175 से ज़्यादा लोग जान गंवा चुके हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि इस पूरी लड़ाई को खत्म करने के लिए लेबनान में युद्धविराम होना बहुत ज़रूरी है, तभी कोई अंतिम समझौता हो सकेगा।
