ईरान के जंगी जहाज IRIS Dena पर अमेरिकी हमले के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। मार्च के शुरुआत में हुए इस हमले में 84 ईरानी नौसैनिकों की जान गई थी, जिनके लिए हाल ही में बड़े पैमाने पर शोक यात्रा निकाली गई। ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। श्रीलंका के पास समुद्र में हुए इस हमले से खाड़ी देशों और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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ईरान और अमेरिका के बीच इस हमले को लेकर क्या है विवाद?

ईरान का कहना है कि उसका जहाज IRIS Dena एक शांतिपूर्ण मिशन पर था और उसे श्रीलंका ने आमंत्रित किया था। ईरानी राजदूत अलीरेजा डेलखोस के मुताबिक, इस जहाज पर कोई हथियार नहीं थे और अमेरिका ने बिना किसी चेतावनी के इस पर हमला किया। दूसरी ओर, अमेरिका के रक्षा सचिव पेट हेगसेथ ने पुष्टि की कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से इस जहाज को डुबो दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि ईरान की नौसेना को निशाना बनाना उनके मुख्य लक्ष्यों में से एक था।

इस पूरी घटना में श्रीलंका और भारत का क्या संबंध है?

ईरान का यह जहाज भारत में हुए MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल होकर वापस लौट रहा था। श्रीलंका के गाले तट से करीब 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी USS Charlotte ने इसे निशाना बनाया। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेरथ ने बताया कि उनकी सरकार ने मानवीय आधार पर इस मामले में मदद की और बचे हुए लोगों को बचाने के लिए बचाव अभियान चलाया। श्रीलंका ने एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Bushehr के चालक दल के 208 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी सहायता की।

घटना से जुड़ी मुख्य तारीखें और अहम जानकारी

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
हमले की तारीख 4 मार्च 2026
जहाज का नाम IRIS Dena (ईरान)
हमलावर पनडुब्बी USS Charlotte (अमेरिका)
शोक यात्रा की तारीख 18 मार्च 2026
हताहत हुए लोग 84 नौसैनिकों की मौत
हमले की जगह श्रीलंका के तट के पास

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस हमले को एक अमानवीय अपराध बताया है। उन्होंने उन 84 नौसैनिकों को याद किया जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई। ईरान के सेना कमांडर अमीर हातमी ने साफ कहा है कि अमेरिका के इस हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि यह हमला एक ऐसे इलाके में हुआ जो व्यापारिक जहाजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।