ईरान के खुज़ेस्तान प्रांत में बन रहे डार्कहोविन (Darkhovin) परमाणु ऊर्जा संयंत्र को 19 जुलाई 2026 को अमेरिका द्वारा निशाना बनाया गया। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और बर्बर कार्रवाई करार दिया है। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि इस तरह के हमलों के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की प्रतिक्रिया

इस हमले की जानकारी मिलने के बाद IAEA ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि डार्कहोविन संयंत्र अभी निर्माण के शुरुआती चरण में है और वहां कोई भी परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, इसलिए फिलहाल किसी भी तरह के विकिरण (radiation) का खतरा नहीं है। इसके बावजूद, IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने सभी देशों से परमाणु स्थलों के आसपास सैन्य संयम बरतने की अपील की है।

अमेरिका का रुख और सैन्य तैनाती

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला जॉर्डन में अपने बेस पर हुए हमले के जवाब में किया गया है। अमेरिका ने अपने सैन्य अभियानों के तहत ईरान की समुद्री निगरानी, एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल व ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया है। साथ ही, संभावित सैन्य विस्तार को देखते हुए अमेरिका ने इजरायल में अतिरिक्त रिफ्यूलिंग विमान तैनात कर दिए हैं। इस पूरे तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है, जहां पहले से ही मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.