ईरान के कई बड़े इलाकों में 30 जुलाई 2026 को अचानक जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरा क्षेत्र दहल गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Abadan, Qeshm Island, Bandar Abbas, Abu Musa Island और Kish में हुए इन धमाकों के बाद ईरान में हड़कंप मच गया। ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों का आरोप अमेरिकी सेना पर लगाया है और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
हमले के पीछे की वजह और अमेरिका का रुख
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय CENTCOM ने पुष्टि की कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल सिस्टम और नौसैनिक केंद्रों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया कि अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। साथ ही, ब्रिटिश प्रधानमंत्री Andy Burnham ने भी इन रक्षात्मक हमलों के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी दी है।
बढ़ता तनाव और सुरक्षा अलर्ट
इस स्थिति को देखते हुए ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। ईरानी प्रशासन ने Tehran, Chabahar, Mahshahr, Sirik और Tabriz जैसे इलाकों में अपनी वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense) को सक्रिय कर दिया है और सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया है। यह तनाव बीते 29 जुलाई 2026 को इराक में हुई झड़पों के बाद और गहरा गया है, जिसमें ईरान के Revolutionary Guard के सदस्यों के हताहत होने की खबर थी। यह पूरी घटना खाड़ी देशों में रह रहे लोगों और प्रवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
