अमेरिकी सेना ने 22 जुलाई 2026 को ईरान के हमदान प्रांत स्थित कबूतरहांग काउंटी में हवाई हमले किए। यह लगातार 11वीं रात है जब अमेरिका ने ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस दौरान तेहरान के पास हवाई सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया और देश के कई हिस्सों में धमाकों की आवाज सुनी गई।
हमले का उद्देश्य और सरकारी बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि इन हमलों का लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी क्षमता को कम करना है। हमलों में सैन्य संचालन केंद्र, ड्रोन स्टोरेज, विमान हैंगर और रसद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अभी और हमले किए जा सकते हैं, जिसमें ‘पिकैक्स माउंटेन’ भूमिगत परिसर भी शामिल हो सकता है। रक्षा सचिव Pete Hegseth के अनुसार, इस युद्ध पर अब तक करीब 37.5 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है।
क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष
जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ समझौता अब पूरी तरह टूट चुका है। इन हमलों के बाद तनाव बढ़ गया है, क्योंकि ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर भी जवाबी हमले किए हैं। इससे खाड़ी देशों में क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं, जिसका सीधा असर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों और अन्य लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
