अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया कि अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान द्वारा सीजफायर यानी युद्धविराम के समझौते को दोबारा तोड़ने के बाद की गई है।
दरअसल, दोनों देशों के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता (MoU) हुआ था। इस समझौते के मुताबिक 60 दिनों तक युद्ध नहीं होगा और Strait of Hormuz को जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाएगा। इस डील में ईरान को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से कोई पैसा नहीं लेगा और उन्हें बिना किसी परेशानी के जाने देगा।
ईरान ने कैसे तोड़ा समझौता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस समझौते की धज्जियां उड़ा दीं। इसकी शुरुआत 25 जून 2026 को हुई जब ईरान ने सिंगापुर के एक कार्गो शिप M/V Ever Lovely पर ड्रोन हमला किया। इसके बाद 27 जून को पनामा के एक ऑयल टैंकर M/T Kiku को भी निशाना बनाया गया। इसी दिन बहरीन ने भी खबर दी कि ईरान ने उनके इलाके में कई ड्रोन भेजे हैं।
अमेरिका की कड़ी कार्रवाई
ईरान की इन हरकतों के बाद अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने जवाबी हमला किया। 26 और 27 जून को अमेरिका ने ईरान के उन ठिकानों को तबाह कर दिया जहां मिसाइल और ड्रोन रखे जाते थे। इसके अलावा तटीय राडार, संचार सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स और माइन लेयर क्षमताओं को भी निशाना बनाया गया।
बड़े नेताओं ने क्या कहा
- Donald Trump: उन्होंने ईरान की इस हरकत को बेवकूफी भरा बताया और कहा कि यह सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन है।
- JD Vance: अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को कोई समस्या थी, तो उसे बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए था।
- CENTCOM: अमेरिकी सेना ने इसे बिना वजह का हमला बताया और कहा कि ईरान को मौका दिया गया था लेकिन उसने हमला करना चुना।
- ईरान का पक्ष: ईरानी संसद के सदस्य Ebrahim Azizi ने इन आरोपों को नकारा। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz पर ईरान का हक है और यह हमला नहीं बल्कि सीजफायर का मैनेजमेंट था। वहीं IRGC ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया है।
इस लड़ाई की वजह से अब सीजफायर समझौता टूटने की कगार पर है। दोनों देशों के बीच Strait of Hormuz के कंट्रोल और ईरान के फ्री हुए पैसों के इस्तेमाल को लेकर काफी विवाद चल रहा है।
