अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम आत्मरक्षा में उठाया गया था क्योंकि ईरान की तरफ से लगातार ड्रोन हमले की कोशिशें की जा रही थीं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हलचल मच गई है और सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

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अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हमला क्यों किया?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 5 जून 2026 को ईरान की तरफ से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की ओर चार खतरनाक ड्रोन भेजे गए थे। इन ड्रोनों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों को बड़ा खतरा था। अमेरिकी सेना ने पहले इन चारों ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। इसके तुरंत बाद, भविष्य के हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के तटीय रडार सिस्टम और निगरानी ठिकानों पर बमबारी कर दी। यह हमले मुख्य रूप से गोरुक और केश्म द्वीप पर किए गए। इससे पहले जून के शुरुआती दिनों में भी अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटर्स को निशाना बनाया था जब ईरान ने अमेरिका का एक MQ-1 ड्रोन मार गिराया था।

ईरान और अमेरिका के बीच क्या दावे किए जा रहे हैं?

इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच बयानों का दौर शुरू हो गया है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं।

  • अमेरिकी सेना का दावा: CENTCOM ने साफ किया कि अमेरिकी बलों ने पूरी तरह आत्मरक्षा में कार्रवाई की है और अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर ईरान के हमले के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। इसके अलावा, हिंद महासागर में एक प्रतिबंधित पोत MT DAVINA को भी अमेरिकी नौसेना ने कब्जे में लिया है।
  • ईरान का जवाब: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का दावा है कि उन्होंने दक्षिणी ईरान पर हमले के जवाब में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है और अमेरिकी युद्धपोतों को पीछे हटने पर मजबूर किया है।
  • सैन्य सलाहकार की चेतावनी: ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रजाई ने चेतावनी दी है कि वे बंदरगाहों की नाकेबंदी को बर्दाश्त नहीं करेंगे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह ईरान का नियंत्रण है।

इस तनाव का खाड़ी देशों और व्यापार पर क्या असर होगा?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग माना जाता है। इस रास्ते से भारी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। अमेरिका द्वारा की गई इस कार्रवाई और ईरान के कड़े तेवरों के बाद समुद्र में तनाव बढ़ गया है। CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से लगभग 129 व्यापारिक जहाजों के रास्ते बदले गए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए यह तनाव चिंता का विषय है क्योंकि तेल की कीमतों और समुद्री सुरक्षा का सीधा असर खाड़ी क्षेत्र के कारोबार पर पड़ता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान के किन इलाकों में बमबारी की है?

अमेरिका ने ईरान के गोरुक (Goruk) और केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर स्थित तटीय रडार निगरानी ठिकानों और ड्रोन कंट्रोल सेंटर्स पर बमबारी की है।

यह सैन्य टकराव किस वजह से शुरू हुआ?

यह तनाव तब बढ़ा जब ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की तरफ चार ड्रोन लॉन्च किए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने मार गिराया और फिर आत्मरक्षा में उनके रडार सिस्टम पर जवाबी हमले किए।

क्या इस हमले में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को नुकसान पहुंचा है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करके उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.