अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है. अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए दौर के हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी के कई देशों को निशाना बनाया है. इस तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया गया है, जिससे समुद्री रास्तों और व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है.
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यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि 11 जुलाई 2026 को ईरान के खिलाफ ये हमले किए गए. यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा एक कमर्शियल जहाज M/V GFS Galaxy पर किए गए हमले का जवाब थी. इस जहाज पर हमले के बाद एक क्रू मेंबर लापता हो गया और जहाज के इंजन रूम में भारी नुकसान हुआ, जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया. अमेरिका ने साफ किया कि उसका मकसद ईरान की उस क्षमता को खत्म करना है जिससे वह समुद्री जहाजों को खतरा पहुंचाता है.
इस घटना के तुरंत बाद IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अगली सूचना तक बंद करने का ऐलान कर दिया. उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ चल रहा युद्धविराम अब खत्म हो गया है. इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और कतर के साथ-साथ जॉर्डन के अल अज़रक एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए.
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 11 जुलाई को मस्कट में ओमान के अधिकारियों से मिले. इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित निकलने के तरीकों पर चर्चा हुई, लेकिन अभी तक किसी समझौते की खबर नहीं आई है.
दूसरी ओर, सऊदी अरब ने ईरान द्वारा अपने पड़ोसी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है. सऊदी का कहना है कि ये हमले देशों की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरा है. वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता की मौत का बदला लेने की बात कही है.
ईरान ने सार्वजनिक तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने कच्चे तेल की बिक्री से जुड़ी छूट खत्म करके समझौते का उल्लंघन किया है. हालांकि, ईरान के कुछ अधिकारियों ने ट्रंप के सलाहकारों को निजी तौर पर बताया कि जहाज पर हुआ हमला एक गलती थी और वे बातचीत जारी रखना चाहते हैं.
