खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। 13 जुलाई 2026 को अमेरिका के CENTCOM ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की। इस दौरान अमेरिका ने फाइटर जेट्स, नौसैनिक जहाजों और पहली बार समुद्र से छोड़े जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया। इन हमलों का मुख्य मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा करना और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम करना है।
कुवैत और जॉर्डन पर हमले
इस जवाबी कार्रवाई में ईरान के IRGC ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन के सैन्य अड्डों पर हमले का दावा किया है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनके उत्तरी सीमावर्ती केंद्रों और एक तेल प्लेटफॉर्म पर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा ईरान ने जॉर्डन स्थित प्रिंस हसन एयरबेस और बहरीन में शेख ईसा एयरबेस को भी निशाना बनाने की बात कही है।
तनाव का असर और मौजूदा स्थिति
ईरान ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, लेकिन अमेरिका ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। CENTCOM का कहना है कि यह व्यापारिक मार्ग खुला है और वे समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क हैं। इस सैन्य संघर्ष में अब तक ईरान में दो लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।
