अमेरिकी रक्षा मुख्यालय CENTCOM ने पुष्टि की है कि 21 जुलाई 2026 को लगातार 11वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। अमेरिकी सेना लगातार ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बना रही है।
तनाव का असर और बढ़ता हुआ खर्चा
इस संघर्ष में अब तक लगभग $37.5 बिलियन का खर्च हो चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने बताया कि ईरान को अपने किए का भारी भुगतान करना पड़ेगा। वहीं, इस संघर्ष के दौरान अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और करीब 100 सैनिक घायल हुए हैं। क्षेत्र में तनाव के कारण बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में भी ईरानी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जहां जॉर्डन की सेना ने ईरान से आए 5 ड्रोन और 3 मिसाइल को हवा में ही मार गिराया है।
समुद्री व्यापार और कूटनीतिक प्रयास
भले ही CENTCOM का कहना है कि मई की शुरुआत से अब तक करीब 900 जहाज सुरक्षित निकले हैं, लेकिन कई रिपोर्टों में व्यापारिक गतिविधियों में भारी कमी देखी जा रही है। अमेरिका द्वारा लगाए गए नाकेबंदी के कारण 8 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदलना पड़ा है। कतर, मिस्र और पाकिस्तान की ओर से 10 दिनों के संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन फिलहाल जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया है और सैन्य कार्रवाई जारी है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता का विषय बनी हुई है।
