मध्य पूर्व में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। 30 जुलाई 2026 को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय CENTCOM ने इसे ईरान द्वारा अमेरिकी बलों पर किए गए हमलों का करारा जवाब बताया है। यह हमला रात 8 बजे के करीब हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है।
हमलों की शुरुआत और तनाव की वजह
यह कार्रवाई पिछले कुछ दिनों से जारी हमलों के बाद हुई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी ठिकानों पर 30 से ज्यादा ड्रोन हमले किए थे। इसके अलावा, जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें जॉर्डन की एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच रास्ते में ही रोक दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पहले ही कहा था कि वे इन हमलों का कड़ा जवाब देंगे।
सऊदी और इराक पर प्रभाव
इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिका के साथ सऊदी अरब की सेना भी शामिल रही। 29-30 जुलाई की रात को दोनों देशों ने इराक के अंदर लॉजिस्टिक और हथियारों के ठिकानों पर स्ट्राइक की। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे अपना आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। वहीं, इराक की सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन माना है, जिसके कारण इराक के प्रधानमंत्री ने अपनी सऊदी अरब की यात्रा को स्थगित कर दिया है।
ईरान की प्रतिक्रिया और नए प्रतिबंध
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को गैर-कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान के IRGC से जुड़े संगठनों पर नए प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों को जबरन रोकने और वसूली करने की कोशिशों के बाद उठाया गया है। फिलहाल, इस सैन्य तनाव के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
