अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित 80 से ज़्यादा मिलिट्री ठिकानों पर ज़ोरदार हमला किया है। यह घटना 7 जुलाई 2026 की है, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को बहुत बढ़ा दिया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने मासूम नागरिकों वाले जहाजों को निशाना बनाया, इसलिए यह सख्त कार्रवाई की गई।

U.S. Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की उन क्षमताओं को खत्म करना था जिससे वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में रुकावट डालता है। ईरानी मीडिया ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हुए और सिरिक, क़ेशम आइलैंड और बंदर अब्बास जैसे इलाकों में बड़े धमाके हुए।

जहाजों पर हमले के बाद बिगड़े हालात

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। इन जहाजों के नाम M/T Al Rekayyat, M/T Wedyan और M/T Cyprus Prosperity थे। इस हमले के साथ ही 17 जून 2026 को हुआ समझौता (MoU) टूट गया, जिसका मकसद समुद्र के रास्ते को दोबारा खोलना और बातचीत आगे बढ़ाना था।

इसी के जवाब में अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरान के तेल निर्यात से जुड़ी अस्थायी छूट (General License X) को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है।

ट्रंप की चेतावनी और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान की गलतियों की वजह से अब सीज़फ़ायर खत्म हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इस काम को पूरा करेगा और बिना किसी डील के ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त (de-nuclearise) कर सकता है।

दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी मिलिट्री साइट्स को भी निशाना बनाया है। वहीं, NATO चीफ मार्क रुट्टे ने अमेरिका के इन हमलों को बिल्कुल ज़रूरी बताया है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.