अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के गेश्म द्वीप और गोरुक में रडार और ड्रोन कमांड सेंटरों पर हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने के जवाब में की गई है। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और कुवैत में भी संदिग्ध हवाई हमलों की वजह से सायरन बजने लगे हैं।

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अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हमला क्यों किया?

अमेरिकी सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में शांतिपूर्वक काम कर रहे एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था। इसके जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए ईरान के हवाई रक्षा सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो खतरनाक ड्रोनों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना का कहना है कि ये ईरानी ड्रोन क्षेत्र में जहाजों के लिए सीधा खतरा बने हुए थे। इस पूरे सैन्य ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और कुवैत में मची अफरातफरी

अमेरिकी हमलों के बाद सोमवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की कि उन्होंने बदला लेने के लिए एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। हालांकि, उन्होंने इस ठिकाने के नाम का खुलासा नहीं किया। इसी तनाव के बीच कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी KUNA ने बताया कि कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने देश की हवाई सीमा में आ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। इस हमले की चेतावनी के तौर पर पूरे कुवैत में खतरे के सायरन बजाए गए, जिससे प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों में घबराहट फैल गई।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान के किन क्षेत्रों को निशाना बनाया है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के गोरुक क्षेत्र और गेश्म द्वीप पर स्थित रडार और ड्रोन कमांड कंट्रोल स्टेशनों पर हवाई हमले किए हैं।

कुवैत में सायरन क्यों बज रहे थे?

1 जून 2026 को कुवैत की ओर आ रहे संदिग्ध ड्रोन और मिसाइल हमलों को वहां के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया, जिसके कारण पूरे देश में चेतावनी के सायरन बजाए गए थे।