अमेरिकी सेना की CENTCOM ने 18 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे ईरान पर हवाई हमलों का नया दौर शुरू किया। यह कार्रवाई लगातार सातवीं रात है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों को खतरा पहुंचाता है, साथ ही जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देना भी है।
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हमले का दायरा और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर किए गए इन हमलों में ईरान के सैन्य अड्डों, सर्विलांस केंद्रों, हथियारों के गोदाम और रसद केंद्रों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेना ने इसके लिए फाइटर जेट्स, ड्रोन्स और जंगी जहाजों का इस्तेमाल किया। हाल ही में जॉर्डन में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और एक लापता है। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर भी हमले किए, जिसमें कुवैत का एक डिसेलिनेशन प्लांट भी प्रभावित हुआ।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सख्त नाकेबंदी
तनाव को देखते हुए CENTCOM ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है। अमेरिकी नौसेना ने चार कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया है, एक जहाज को निष्क्रिय कर दिया और एक पर सवार होकर सुरक्षा सुनिश्चित की। ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ किए गए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को फिलहाल निलंबित कर दिया है।
