अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार सातवीं रात सैन्य हमले किए हैं। यह अभियान 8 जुलाई को दोनों देशों के बीच हुए समझौते के टूटने के बाद शुरू हुआ। अमेरिका का कहना है कि वे ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं। इस हमले में अमेरिकी सेना ने लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करके ईरान के तटीय निगरानी, एयर डिफेंस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स ठिकानों को निशाना बनाया है।

हमलों का दायरा और नुकसान

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने जानकारी दी कि इन हमलों में खमीर काउंटी के 5-6 पुल, बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन, चाबहार पोर्ट का ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और ईरानशहर हवाई अड्डा नष्ट कर दिए गए हैं। उधर, ईरानी मीडिया का दावा है कि इन हमलों में 3 नागरिकों की मौत हुई है और 9 लोग घायल हुए हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी हमले बंद नहीं हुए, तो वे पूरे स्तर पर आक्रामक कार्रवाई करेंगे।

खाड़ी देशों पर असर और तनाव

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। कुवैत में एक बच्चे के घायल होने और डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुँचने की भी खबर है। जॉर्डन की सेना ने ईरान की ओर से आ रही 3 बैलिस्टिक मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं। सीरिया के अल-तनफ में अमेरिकी कमांड सेंटर पर भी हमले का दावा किया गया है। इन लगातार हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है और क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.