अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। 10 जून 2026 को अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर किए गए हमलों में मिनाब शहर के कोरगन गांव में दो नागरिक घायल हो गए हैं। ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, ये लोग अमेरिकी हथियारों के मलबे की चपेट में आने से घायल हुए हैं। इस सैन्य टकराव के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में अशांति फैल गई है और ईरान ने इसके जवाब में कई पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं।
अमेरिका ने ईरान पर क्यों किए ताबड़तोड़ हमले?
अमेरिकी सेना और सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उन्होंने 10 जून 2026 को ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 9 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में ईरानी हवाई रक्षा प्रणालियों, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और रडार साइटों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन हमलों का बचाव करते हुए इन्हें बहुत मजबूत बताया और कहा कि बातचीत रुकने के कारण ईरान को इसकी कीमत चुकानी होगी।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और खाड़ी देशों पर इसका असर
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे देश की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताया है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों से सीरीक में पानी के दो बड़े जलाशयों को नुकसान पहुंचा है, जिससे हजारों लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने अपनी सीमा में आने वाले इन संदिग्ध ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेना के अनुसार, 9 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान द्वारा एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई की।
ईरान के हमलों का किन अन्य देशों पर असर पड़ा है?
ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन दागे, जिन्हें संबंधित देशों की सेनाओं ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया।
