ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 15 जुलाई 2026 को अमेरिकी सैन्य बल CENTCOM ने लगातार पांचवें दिन ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए। ये हमले ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के जवाब में किए गए हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कम करना है जिसका इस्तेमाल वे समुद्री व्यापार में बाधा डालने के लिए कर रहे हैं।
🚨: Gulf देशों पर ईरान का बड़ा हमला, कुवैत और बहरीन में मची अफरातफरी, सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी।
हमलों का दायरा और नुकसान
ताजा कार्रवाई के तहत अमेरिकी विमानों और ड्रोन ने Greater Tunb Island पर स्थित मिसाइल स्टोरेज और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया। ईरान की सेना ने दावा किया है कि इस दौरान इरानशहर के पास हुए हमले में उनके 7 सैन्यकर्मी मारे गए हैं। वहीं, सरकारी प्रवक्ता के अनुसार पिछले कुछ दिनों में कुल 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।
गल्फ देशों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय चिंता
ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों को जॉर्डन, कुवैत और बहरीन के डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया। कुवैत ने इस हमले को आक्रामक बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान कोई समझौता नहीं करता, तब तक ये हमले जारी रहेंगे और अमेरिका ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पावर प्लांट और पुलों को भी निशाना बना सकता है। सऊदी अरब ने भी ईरान की इन गतिविधियों की निंदा की है। इस पूरे तनाव के बीच अब ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना ने फिर से नाकेबंदी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्र में व्यापार और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
