अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध की शक्ल ले चुका है। 8 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच अमेरिका ने ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के कोनारक और चाबहार पोर्ट शहरों पर जोरदार हमले किए। इन धमाकों के बाद इलाके में काफी अफरा-तफरी मच गई और कई जगह बिजली गुल हो गई।
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ये हमले इसलिए किए गए ताकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों के आने-जाने के रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस बार का सैन्य ऑपरेशन पहले के मुकाबलों से बड़ा था। इसमें चाबहार के पोर्ट फैसिलिटी, मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और एक डिपो को निशाना बनाया गया। इसके साथ ही बुशहर के पास ड्रोन साइट्स पर भी हमला हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के मलबे से चाबहार के इमाम अली अस्पताल को भी नुकसान पहुँचा है।
ईरान ने इन हमलों को अमेरिकी शासन का आपराधिक कृत्य बताया है। ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी कमेटी के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने चेतावनी दी कि अमेरिकी सेना को दुनिया भर में इसका करारा जवाब मिलेगा। वहीं, सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने कहा कि हमलावर दुश्मन और उसके साथियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों के दौरान वहां सायरन बज उठे और कुवैत में एक सैनिक के घायल होने की खबर आई है।
साल 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ता जा रहा है। इस अस्थिरता की वजह से संभावना है कि 31 जुलाई तक ईरान का पूरा हवाई क्षेत्र (airspace) बंद हो जाएगा।
